यह डॉक्यूमेंट क्या है
पर्सनल लोन एग्रीमेंट वह दस्तावेज़ है जिसमें उधार देने वाले और लेने वाले के बीच की पूरी बात दर्ज होती है — कितनी रकम दी गई, कब और कैसे लौटाई जाएगी, और ब्याज लगेगा या नहीं। सिर्फ़ ज़बानी भरोसे या इधर-उधर बिखरी WhatsApp चैट पर टिके रहने के बजाय सारी शर्तें एक जगह लिखी होती हैं। दोनों पक्ष साइन कर देते हैं, तो पहले दिन से आख़िरी भुगतान तक हर किसी को साफ़ पता रहता है कि उससे क्या उम्मीद है।
ध्यान रखें कि यह दस्तावेज़ बनाने में मदद के लिए एक सामान्य टेम्पलेट है — कोई भी टेम्पलेट इसकी गारंटी नहीं दे सकता कि एग्रीमेंट हर स्थिति में कानूनी रूप से मान्य या लागू होगा। हर देश के नियम अलग हैं, और बड़ी रकम के मामलों में स्टांप पेपर, नोटरी या वकील की सलाह की ज़रूरत पड़ सकती है। फिर भी, साफ़ लिखा और साइन किया हुआ दस्तावेज़, पैसे ट्रांसफ़र के सबूत के साथ, किसी भी अनबन की स्थिति में बहुत काम आता है।
कब इस्तेमाल करें
- आप किसी पुराने सहकर्मी या जान-पहचान वाले को ₹50,000 जैसी बड़ी रकम उधार दे रहे हैं और चाहते हैं कि शर्तें लिखित में हों।
- ब्याज या लौटाने की तारीख़ तय हुई है और आप नहीं चाहते कि आगे चलकर इस पर बहस हो।
- कोई परिचित आपसे उधार माँग रहा है और दोनों पक्ष चाहते हैं कि पैसा देने से पहले हर शर्त साफ़ हो।
- आप भुगतान का तरीका दर्ज करना चाहते हैं — जैसे हर महीने UPI या बैंक ट्रांसफ़र से किस्त।
- पहले ज़बानी उधार देकर परेशानी झेल चुके हैं और अब हर नए लोन के लिए लिखा-पढ़ी चाहते हैं।
कब इस्तेमाल न करें
- अगर आप कारोबार की तरह नियमित रूप से ब्याज पर पैसे उधार देते हैं — कई देशों में इसके लिए लाइसेंस और मनी-लेंडिंग से जुड़े नियम होते हैं, इसलिए पहले वकील से बात करें।
- रकम बहुत बड़ी है या बदले में ज़मीन, मकान या गाड़ी गिरवी रखी जा रही है — ऐसा दस्तावेज़ किसी प्रोफ़ेशनल से बनवाना ज़्यादा सुरक्षित है।
- विवाद पहले ही शुरू हो चुका है और मामला कोर्ट तक जा सकता है — तब आपको टेम्पलेट नहीं, कानूनी सलाह चाहिए।
- उधार लेने वाला चुका नहीं पा रहा और नई योजना पर बात हो रही है — उसके लिए किस्त भुगतान एग्रीमेंट या नया शेड्यूल ज़्यादा सही रहेगा।
आपको किन जानकारियों की ज़रूरत होगी
- उधार देने और लेने वाले, दोनों का पूरा नाम और पहचान का विवरण
- दोनों पक्षों का पता और मोबाइल नंबर
- उधार की सटीक रकम — अंकों और शब्दों, दोनों में
- पैसा देने की तारीख़ और तरीका — नकद, बैंक ट्रांसफ़र या UPI
- ब्याज लगेगा या नहीं, और लगेगा तो कैसे जोड़ा जाएगा
- चुकाने का शेड्यूल — एकमुश्त या किस्तों में, तारीख़ों के साथ
- किस्त लेट होने या न चुका पाने पर क्या तय हुआ है
- गवाह रखने हों तो उनके नाम
इसमें शामिल क्लॉज़
पक्ष
उधार कौन दे रहा है और कौन ले रहा है — पूरा नाम और पहचान के विवरण के साथ।
लोन की रकम
उधार दी गई सटीक रकम, अंकों और शब्दों दोनों में, ताकि कोई गड़बड़ी न हो।
पैसा देने का तरीका
पैसा कैसे दिया गया — नकद, बैंक ट्रांसफ़र या UPI — और किस तारीख़ को।
ब्याज
ब्याज है या नहीं, कितना है, और किस तरह जोड़ा जाएगा।
भुगतान शेड्यूल
हर किस्त की तारीख़ और रकम, या एकमुश्त भुगतान की एक तय तारीख़।
भुगतान का तरीका
पैसा कहाँ और कैसे लौटाया जाएगा — जैसे उधार देने वाले का बैंक खाता या UPI ID।
देर से भुगतान
तय तारीख़ निकल जाने पर क्या होगा — यह पहले से लिखा हो।
समय से पहले चुकौती
क्या बची हुई रकम तय तारीख़ से पहले, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के, चुकाई जा सकती है।
हस्ताक्षर
दोनों पक्षों के साइन तारीख़ के साथ, और गवाह हों तो उनके भी।
गाइडेड बिल्डर क्या-क्या पूछता है
- 1पक्षWho is providing the money?
- 2राशिHow much is being provided?
- 3रीपेमेंटWill it be repaid once or in installments?
- 4ब्याजWill interest apply?
- 5देर से भुगतानWhat happens if a payment is late?
- 6अतिरिक्त शर्तेंAdditional terms (optional)
- 7समीक्षाइसमें शामिल क्लॉज़
- 8एक्सपोर्टExport PDF · Export DOCX
साइन कैसे करें
दो कॉपी प्रिंट करें और दोनों पर उधार देने वाला और लेने वाला तारीख़ डालकर साइन करें। साइन की हुई कॉपी दोनों पक्षों के पास रहनी चाहिए — सिर्फ़ उधार देने वाले के पास नहीं। गवाह हों तो उनसे भी साइन कराएँ और उनका पूरा नाम लिखें।
साइन की हुई कॉपी को पैसे ट्रांसफ़र के सबूत के साथ सँभालकर रखें: बैंक ट्रांसफ़र का कन्फ़र्मेशन, UPI ट्रांज़ैक्शन ID का स्क्रीनशॉट, या नकद दिया हो तो एक सादी रसीद। जिस WhatsApp चैट में उधार की बात हुई थी, उसके स्क्रीनशॉट भी सहायक सबूत के तौर पर काम आते हैं।
कई जगहों पर ऐसे एग्रीमेंट के लिए इलेक्ट्रॉनिक साइन भी चलते हैं, पर नियम हर देश में अलग हैं। रकम बड़ी हो या आप ज़्यादा पक्का दस्तावेज़ चाहते हों, तो पता करें कि आपके यहाँ ऐसे मामलों में स्टांप पेपर या नोटरी का चलन है या नहीं।
आम गलतियाँ
- रकम शब्दों में नहीं लिखना — फिर बहस होती है कि ₹15,000 तय हुए थे या ₹1,50,000।
- लौटाने की कोई साफ़ तारीख़ नहीं — 'जब पैसे होंगे तब' कोई शेड्यूल नहीं है।
- नकद देना, पर न रसीद लेना और न ही ऐसा कोई मैसेज जिससे पता चले कि पैसा मिला।
- किस्त लेट होने पर क्या होगा, इस पर बात ही न करना — फिर अचानक अतिरिक्त रकम माँगने पर झगड़ा होता है।
- साइन किए एग्रीमेंट की एक ही कॉपी बनना, और वह भी सिर्फ़ एक पक्ष के पास रहना।
- बहुत ज़्यादा ब्याज लगाना, यह जाने बिना कि आपके देश के कानून में इसकी कोई सीमा है या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या लोन एग्रीमेंट के लिए नोटरी या स्टांप पेपर ज़रूरी है?
कई जगहों पर बिना नोटरी के भी साइन किया हुआ एग्रीमेंट काम का होता है, पर नोटरी और स्टांप पेपर से दस्तावेज़ ज़्यादा औपचारिक बनता है और साइन से मुकरना मुश्किल होता है। नियम हर देश में अलग हैं, इसलिए रकम बड़ी हो तो अपने यहाँ का चलन पता करें या वकील से पूछ लें।
क्या हाथ से लिखा एग्रीमेंट मान्य होता है?
आम तौर पर असली बात यह है कि शर्तें साफ़ लिखी हों और दोनों पक्षों ने साइन किया हो — चाहे वह हाथ से ही क्यों न लिखा हो। प्रिंट किए दस्तावेज़ का फ़ायदा यह है कि वह साफ़ रहता है, विवरण पूरे होते हैं और बाद में बदलना मुश्किल होता है। जो भी अपनाएँ, कॉपी दोनों के पास ज़रूर हो।
क्या UPI या बैंक ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड सबूत के लिए काफ़ी है?
ट्रांसफ़र का रिकॉर्ड इस बात का मज़बूत सबूत है कि पैसा गया, पर यह नहीं बताता कि वह उधार था, किसी चीज़ का भुगतान था या गिफ़्ट। साइन किया एग्रीमेंट ही बताता है कि पैसा क्यों गया और कैसे लौटेगा — इसलिए दोनों साथ हों तो सबसे अच्छा है।
मैं कितना ब्याज ले सकता हूँ?
यह हर देश में अलग है — कई जगह ब्याज की ऊपरी सीमा और ज़्यादा वसूली के ख़िलाफ़ नियम हैं। जान-पहचान के उधार में अक्सर ब्याज नहीं होता या बहुत कम होता है। ब्याज लेना ही हो तो प्रतिशत और उसे जोड़ने का तरीका साफ़ लिखें, और अपने यहाँ के नियम ज़रूर देख लें।
उधार लेने वाला पैसे न लौटाए तो क्या करूँ?
शुरुआत नरमी से याद दिलाने से करें, और ज़रूरत पड़े तो औपचारिक डिमांड लेटर भेजें। मामला कोर्ट या आपके यहाँ की किसी और प्रक्रिया तक जाए, तो साइन किया एग्रीमेंट और भुगतान के सबूत ही आपका आधार होंगे। विकल्प हर देश में अलग हैं, इसलिए बड़ी रकम के लिए वकील से सलाह लें।
यह टेम्पलेट सामान्य डॉक्यूमेंट सहायता देता है और कानूनी सलाह का विकल्प नहीं है। कानूनी ज़रूरतें क्षेत्राधिकार, लेन-देन के प्रकार और व्यक्तिगत परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग होती हैं।