क्षेत्राधिकार के हिसाब से ढाला हुआलोन और रीपेमेंट

कर्ज़ स्वीकृति पत्र

ऐसा दस्तावेज़ जिस पर साइन करके उधार लेने वाला मानता है कि उस पर कितनी रकम बाक़ी है और वह उसे कैसे चुकाएगा।

शुरू करने के लिए साइन-अप ज़रूरी नहीं · मुफ़्त

यह डॉक्यूमेंट क्या है

कुछ उधार धीरे-धीरे बनते हैं — कभी UPI से थोड़ा, कभी नकद, बीच में कुछ वापसी भी — और एक दिन साफ़ ही नहीं रहता कि बकाया आख़िर कितना है। कर्ज़ स्वीकृति पत्र वह दस्तावेज़ है जिस पर साइन करके उधार लेने वाला लिखित में मानता है कि उस पर कर्ज़ है, साइन की तारीख़ को बकाया कितना है, और वह उसे कैसे चुकाने वाला है।

यह लोन एग्रीमेंट से अलग है: यह पैसा देने से पहले नहीं, बाद में बनाया जाता है — जब उधार चल तो रहा है पर उसके ठीक-ठाक काग़ज़ नहीं हैं। यह दस्तावेज़ीकरण में एक सामान्य मदद है, नतीजे की कोई गारंटी नहीं — इसका इस्तेमाल और असर देश और स्थिति पर निर्भर करता है। फिर भी, बकाया का लिखित और साइन किया हुआ इक़रार रकम को लेकर होने वाली बहस रोकने में बहुत काम आता है।

कब इस्तेमाल करें

  • आपने पहले बिना किसी काग़ज़ के कई UPI ट्रांसफ़र से उधार दिया था और अब कुल बकाया दर्ज करना चाहते हैं।
  • उधार लेने वाला बकाया मानता है और नई भुगतान योजना पर बात से पहले दोनों उसे लिखना चाहते हैं।
  • कुछ रकम लौट चुकी है और आप साफ़ करना चाहते हैं कि अब कितनी बची है।
  • उधार बरसों से सिर्फ़ ज़बानी चल रहा है और आप चाहते हैं कि और वक़्त बीतने से पहले एक साइन किया दस्तावेज़ हो।
  • और मोहलत देने के लिए हाँ करने से पहले आपको एक साफ़ लिखित आधार चाहिए।

कब इस्तेमाल न करें

  • बकाया रकम पर ही दोनों की राय अलग है — पहले सही रकम पर सहमति बनाएँ, फिर साइन कराएँ।
  • नया उधार दिया जा रहा है — उसके लिए पूरी शर्तों वाला लोन एग्रीमेंट ज़्यादा सही है।
  • उधार लेने वाला मानता ही नहीं कि उस पर कर्ज़ है — वह साइन नहीं करेगा; आपको दूसरे सबूत और शायद कानूनी सलाह चाहिए होगी।
  • मामला कोर्ट या औपचारिक वसूली तक पहुँच चुका है — अगले क़दम वकील पर छोड़ें।

आपको किन जानकारियों की ज़रूरत होगी

  • उधार लेने वाले और देने वाले का पूरा नाम और पहचान का विवरण
  • कर्ज़ कैसे बना — जैसे पिछले साल UPI और नकद में दिए गए कई उधार
  • कुल कितनी रकम उधार गई और कितनी लौट चुकी है, अगर लौटी हो
  • साइन की तारीख़ को बकाया रकम, अंकों और शब्दों में
  • बकाया चुकाने की योजना — एक तारीख़ या किस्तें
  • ब्याज तय हुआ हो तो वह, वरना साफ़ लिखा हो कि ब्याज नहीं है
  • साथ लगाए गए सबूतों की सूची — ट्रांसफ़र, रसीदें या स्क्रीनशॉट

इसमें शामिल क्लॉज़

स्वीकृति की घोषणा

उधार लेने वाले का साफ़ इक़रार कि उस पर सामने वाले का कर्ज़ बाक़ी है।

कर्ज़ कैसे बना

छोटा-सा ब्योरा कि उधार कब और कैसे बना।

बकाया रकम

साइन की तारीख़ को जितनी रकम चुकानी बाक़ी है, वह सटीक लिखी हो।

अब तक की वापसी

जो रकम लौट चुकी है उसका हिसाब, ताकि पता रहे कि बकाया किस आधार पर निकला।

चुकाने की योजना

बकाया कब और कैसे चुकाया जाएगा।

ब्याज और बाक़ी शर्तें

ब्याज, मोहलत या बकाया से जुड़ी कोई और तय बात हो तो वह।

साइन और तारीख़

उधार लेने वाले का साइन — और चाहें तो देने वाले और गवाह के भी — तारीख़ के साथ।

गाइडेड बिल्डर क्या-क्या पूछता है

  1. 1
    पक्षWho is providing the money?
  2. 2
    राशिHow much is being provided?
  3. 3
    रीपेमेंटWill it be repaid once or in installments?
  4. 4
    ब्याजWill interest apply?
  5. 5
    देर से भुगतानWhat happens if a payment is late?
  6. 6
    अतिरिक्त शर्तेंAdditional terms (optional)
  7. 7
    समीक्षाइसमें शामिल क्लॉज़
  8. 8
    एक्सपोर्टExport PDF · Export DOCX
यह डॉक्यूमेंट मुफ़्त बनाएँ

साइन कैसे करें

इस दस्तावेज़ में सबसे अहम साइन उधार लेने वाले का है, क्योंकि बकाया वही स्वीकार कर रहा है। फिर भी बेहतर है कि उधार देने वाला भी साइन करे, ताकि दिखे कि लिखी हुई रकम और योजना पर वह भी सहमत है। दो कॉपियाँ बनाएँ ताकि दोनों के पास एक-एक रहे।

मूल उधार और अब तक की वापसी के सबूत इसके साथ नत्थी करें या सँभालकर रखें — UPI ट्रांसफ़र के स्क्रीनशॉट, बैंक का कन्फ़र्मेशन, या WhatsApp चैट के वे हिस्से जहाँ पैसे माँगे और मिलने की बात मानी गई। यह दस्तावेज़ और वे सबूत साथ मिलकर अकेले-अकेले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हैं।

बकाया बड़ा हो तो पता कर लें कि आपके यहाँ ऐसे दस्तावेज़ नोटरी कराने या स्टांप पेपर पर बनवाने का चलन है या नहीं; रिवाज़ और नियम हर देश में अलग हैं।

आम गलतियाँ

  • रसीदों और ट्रांसफ़र से मिलान किए बिना बकाया पर साइन करा लेना — और लिखी हुई रकम ही ग़लत निकलना।
  • लौटाई जा चुकी रकम शामिल न करना — जिससे कर्ज़ असल से बड़ा दिखता है, या उलटा।
  • बकाया तो लिखा पर चुकाने की योजना नहीं — कर्ज़ मान तो लिया गया, पर आगे क्या होगा यह साफ़ नहीं।
  • दस्तावेज़ पर तारीख़ न डालना — फिर पता ही नहीं चलता कि बकाया किस दिन के हिसाब से है।
  • एक ही कॉपी बनना और वह भी उधार देने वाले के पास — सवाल उठे तो उधार लेने वाले के पास देखने को कुछ नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह लोन एग्रीमेंट से कैसे अलग है?

लोन एग्रीमेंट पैसा देने से पहले या देते समय बनता है और उसमें उधार की पूरी शर्तें होती हैं। कर्ज़ स्वीकृति पत्र बाद में बनता है — जब उधार चल तो रहा है पर ढंग का कोई दस्तावेज़ नहीं — ताकि बकाया और चुकाने की योजना दर्ज हो जाए।

साइन दोनों करें या सिर्फ़ उधार लेने वाला?

इस दस्तावेज़ की जान उधार लेने वाले का साइन है, क्योंकि बकाया वही मान रहा है। पर आम तौर पर उधार देने वाले से भी साइन कराया जाता है, ताकि दिखे कि वह रकम और योजना से सहमत है और आगे यह सवाल न उठे कि शर्तें उसने मानी थीं या नहीं।

पहले सब कुछ सिर्फ़ चैट पर तय हुआ था — क्या तब भी यह काम आएगा?

हाँ — यही तो इसका सबसे बड़ा इस्तेमाल है। चैट और ट्रांसफ़र रिकॉर्ड से ब्योरे निकालें, बकाया पर सहमति बनाएँ और उसे एक साफ़ दस्तावेज़ में लिखें। स्क्रीनशॉट फिर भी सँभालकर रखें — कर्ज़ कहाँ से शुरू हुआ, इसके सहायक सबूत वही हैं।

मैं जो रकम कह रहा हूँ, उधार लेने वाला उस पर राज़ी न हो तो?

जिस रकम पर झगड़ा है उस पर साइन के लिए दबाव न डालें। ट्रांसफ़र, रसीदें और चैट फिर से देखें और सही बकाया पर सहमति बनाएँ — चाहें तो उस रकम से शुरू करें जो दोनों मानते हैं। सहमति बने ही नहीं, तो कोई और क़दम उठाने से पहले वकील से बात करें।

क्या इससे पक्का हो जाता है कि पैसा मिल ही जाएगा?

नहीं। कोई दस्तावेज़ उस व्यक्ति से पैसे नहीं दिलवा सकता जिसके पास पैसे नहीं हैं या जो देना नहीं चाहता। इसका फ़ायदा यह है कि बकाया का एक साफ़, साइन किया रिकॉर्ड बन जाता है जिससे मुकरना मुश्किल है — और ज़रूरत पड़ने पर वही बातचीत, तक़ाज़े या आपके देश की कानूनी प्रक्रिया का आधार बनता है।