यह डॉक्यूमेंट क्या है
किस्तों में भुगतान लेन-देन का सबसे आम तरीक़ा है — उधार की मासिक किस्त, जान-पहचान से ख़रीदा फ़्रिज या ऐसी सेवा जिसका पैसा एक साथ देना मुश्किल हो। किस्त भुगतान एग्रीमेंट में कुल देय रकम दर्ज होती है और उसे पक्की तारीख़ और पक्की रकम वाली किस्तों में बाँटा जाता है — ताकि दोनों पक्षों को पता रहे कि हर महीने कितना देना है और हिसाब कब पूरा होगा।
यहाँ के बाक़ी टेम्पलेट की तरह यह भी दस्तावेज़ बनाने में एक सामान्य मदद है — कानूनी वैधता की कोई गारंटी नहीं, क्योंकि नियम हर देश में अलग हैं। इसकी असली ताक़त साफ़-सफ़ाई में है: शेड्यूल लिखा हो, तो यह बहस ही नहीं बचती कि किस्त ₹2,000 की थी या ₹2,500 की, और भुगतान 15 तारीख़ को होना था या महीने के आख़िर में।
कब इस्तेमाल करें
- ₹24,000 का उधार है जो साल भर तक ₹2,000 महीना करके लौटेगा।
- आपने पड़ोसी को फ़्रिज या स्कूटर बेचा है जिसका पैसा हर महीने किस्तों में आएगा।
- कोई काम पूरा हो चुका है — जैसे घर की मरम्मत — और उसका भुगतान हिस्सों में होना है।
- पुराना उधार पहली बात के मुताबिक़ एकमुश्त नहीं लौट पाया और अब आप उसे किस्तों में बदलना चाहते हैं।
- भुगतान हर सैलरी पर होगा और आप चाहते हैं कि हर किस्त की पक्की तारीख़ लिखी हो।
कब इस्तेमाल न करें
- कुल रकम ही अभी साफ़ नहीं या उधार पर विवाद है — पहले उसे सुलझाएँ, या पहले कर्ज़ स्वीकृति पत्र बनाएँ।
- किसी कंपनी या फ़ाइनेंस स्कीम से EMI पर ख़रीदारी हो रही है — उनके अपने कॉन्ट्रैक्ट और नियम होते हैं।
- बीच में कुछ गिरवी है या संपत्ति के काग़ज़ जुड़े हैं — दस्तावेज़ वकील से बनवाएँ।
- पहले के किस्त-वादे बार-बार टूट चुके हैं और अब बात वसूली की है — तब डिमांड लेटर और कानूनी सलाह ज़्यादा सही हैं।
आपको किन जानकारियों की ज़रूरत होगी
- भुगतान करने वाले और पाने वाले का पूरा नाम और विवरण
- कुल देय रकम और वह किस चीज़ की है — उधार, ख़रीदारी या सेवा
- हर किस्त की रकम और किस्तों की कुल संख्या
- हर किस्त की पक्की तारीख़ — जैसे हर महीने की 15 तारीख़
- भुगतान का तरीका — UPI, बैंक ट्रांसफ़र या नकद — और किसे देना है
- कोई डाउन पेमेंट या पहली किस्त पहले ही दी जा चुकी हो तो उसका ब्योरा
- किस्त लेट होने या छूटने पर क्या तय हुआ है — मोहलत, सहमति से कोई अतिरिक्त रकम, या पहले बातचीत
- कुल रकम में ब्याज शामिल है या नहीं
इसमें शामिल क्लॉज़
पक्ष
भुगतान करने वाला और पाने वाला, पूरे नाम और विवरण के साथ।
देनदारी का आधार
कुल रकम किस चीज़ की है — उधार, ख़रीदा हुआ सामान या कोई सेवा।
कुल रकम
पूरी देय रकम, अंकों और शब्दों में।
किस्तों का शेड्यूल
पहली से आख़िरी तक, हर किस्त की रकम और तारीख़।
भुगतान का तरीका
हर किस्त कहाँ जाएगी — जैसे पाने वाले की UPI ID या बैंक खाता।
हर किस्त की रसीद
यह तय बात कि हर भुगतान की रसीद या पुष्टि मिलेगी।
किस्त लेट होने पर
तारीख़ निकलने पर क्या होगा, यह पहले से तय और लिखा हो।
जल्दी चुकौती
क्या बची किस्तें एक साथ, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चुकाई जा सकती हैं।
हस्ताक्षर
दोनों पक्षों के साइन तारीख़ के साथ, और गवाह हो तो उसका भी।
गाइडेड बिल्डर क्या-क्या पूछता है
- 1पक्षWho is providing the money?
- 2राशिHow much is being provided?
- 3रीपेमेंटWill it be repaid once or in installments?
- 4ब्याजWill interest apply?
- 5देर से भुगतानWhat happens if a payment is late?
- 6अतिरिक्त शर्तेंAdditional terms (optional)
- 7समीक्षाइसमें शामिल क्लॉज़
- 8एक्सपोर्टExport PDF · Export DOCX
साइन कैसे करें
एग्रीमेंट और किस्तों के शेड्यूल पर दोनों पक्ष साइन करें और कॉपी दोनों के पास रहे। शेड्यूल अलग पन्ने पर हो तो उस पर भी साइन या शॉर्ट इनिशियल करें, ताकि कोई तारीख़ या रकम बदल न सके।
किस्तें चलने के दौरान हर भुगतान दर्ज करें: UPI या बैंक ट्रांसफ़र का कन्फ़र्मेशन सेव करें, नकद हो तो छोटी रसीद लें-दें। एक सादी सूची — तारीख़, रकम, बचा बकाया — जिसे दोनों मिलकर अपडेट करें, बहुत काम आती है; आख़िरी किस्त के समय हिसाब इसी से मिलेगा।
ऐसे एग्रीमेंट में नोटरी और गवाह का चलन हर देश में अलग है; रकम बड़ी हो तो अपने यहाँ का रिवाज़ पता कर लें।
आम गलतियाँ
- किस्त की तारीख़ धुंधली रखना — सिर्फ़ 'हर महीने', कोई पक्का दिन नहीं — फिर हर बार बहस कि किस्त लेट है या नहीं।
- दी जा चुकी किस्तें कहीं दर्ज न करना — आख़िर में सहमति ही नहीं बनती कि कितनी बची हैं।
- लेट किस्त पर कोई तय बात नहीं — फिर अचानक ऐसी अतिरिक्त रकम माँगी जाती है जिसकी कभी बात ही नहीं हुई थी।
- यह न लिखना कि कुल रकम में ब्याज शामिल है या नहीं — दोनों पक्ष अलग-अलग हिसाब लगाए बैठे रहते हैं।
- बिना लिखित सहमति के किसी और UPI ID या किसी और व्यक्ति को भुगतान करना — फिर विवाद कि वह किस्त गिनी जाएगी या नहीं।
- जल्दी चुकौती पर कोई बात तय न होना — साफ़ नहीं रहता कि बकाया एकमुश्त देने पर कुछ घटेगा या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह लोन एग्रीमेंट से कैसे अलग है?
लोन एग्रीमेंट ख़ुद उधार के बारे में है — पैसा देना, ब्याज वग़ैरह सब उसमें आता है। किस्त भुगतान एग्रीमेंट का फ़ोकस किसी भी देनदारी के भुगतान के शेड्यूल पर है — वह उधार हो, ख़रीदा सामान हो या सेवा। किस्तों में लौटने वाले कई उधार के लिए किस्त-शेड्यूल वाला लोन एग्रीमेंट ही काफ़ी होता है।
क्या सारी किस्तें UPI से दी जा सकती हैं?
हाँ, और इसका फ़ायदा भी है: हर ट्रांसफ़र का अपना रिकॉर्ड बनता है, तारीख़ और रकम के साथ। एग्रीमेंट में वही UPI ID या खाता साफ़ लिखें जिस पर भुगतान होगा, और हर किस्त का कन्फ़र्मेशन सेव करें। बड़ी किस्तों के लिए अपने बैंक या ऐप की ट्रांसफ़र सीमा देख लें।
एक किस्त छूट जाए तो?
लेट किस्त के बारे में जो लिखा है, पहले वही देखें — मोहलत है या तुरंत भुगतान करना है। व्यावहारिक रास्ता अक्सर यही है कि पहले बात करें और छूटी किस्त की नई तारीख़ लिख लें। किस्तें बार-बार छूटने लगें, तो नया शेड्यूल तय करें और उसे एग्रीमेंट में बदलाव के तौर पर लिखें।
लेट किस्त पर जुर्माना रखना चाहिए?
यह आप दोनों का फ़ैसला है — कुछ लोग तारीख़ को गंभीरता से लेने के लिए छोटी अतिरिक्त रकम तय करते हैं, कुछ सिर्फ़ मोहलत रखते हैं। अतिरिक्त रकम रखनी हो तो सटीक रकम लिखें, और याद रखें कि कई देशों में ऐसी वसूली की सीमा होती है — बेतुकी बड़ी रकम न रखें।
आख़िरी किस्त के बाद क्या करें?
भुगतान पाने वाला लिखित में पुष्टि दे कि पूरी रकम मिल गई — आख़िरी किस्त की ऐसी रसीद चलेगी जिसमें लिखा हो कि अब कोई बकाया नहीं। भुगतान करने वाला उसे एग्रीमेंट के साथ सँभालकर रखे; किस्तें पूरी होने का इससे साफ़ सबूत कोई नहीं।
यह टेम्पलेट सामान्य डॉक्यूमेंट सहायता देता है और कानूनी सलाह का विकल्प नहीं है। कानूनी ज़रूरतें क्षेत्राधिकार, लेन-देन के प्रकार और व्यक्तिगत परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग होती हैं।